दुहु दिसि जय जयकार करि निज

दोहा ७९ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

दुहु दिसि जय जयकार करि निज निज जोरी जानि। भिरे बीर इत रामहि उत रावनहि बखानि॥ ७९ ॥

अर्थ

दोनों ओर के योद्धा जय-जयकार करके अपनी-अपनी जोड़ी जानकर इधर श्रीरघुनाथजी का और उधर रावण का बखान करके परस्पर भिड़ गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का दोहा ७९ है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।

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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ