रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार
रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार
दोहा ८८ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार। मैं अकेल कपि भालु बहु माया करौं अपार॥ ८८ ॥
अर्थ
रावण ने हृदय में विचारा कि राक्षसों का नाश हो गया है। मैं अकेला हूँ और वानर-भालू बहुत हैं, इसलिए मैं अब अपार माया रचूँ।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का दोहा ८८ है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।
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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध