राम प्रताप प्रबल कपिजूथा
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा
चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा॥ चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामजी के प्रताप से प्रबल वानरों के झुंड राक्षस योद्धाओं के समूहों को मसल रहे हैं। वानर फिर जहाँ-तहाँ किले पर चढ़ गये और प्रताप में सूर्य के समान श्रीरघुबीर की जय बोलने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ