राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन

दोहा ५५ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन। कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन॥ ५५ ॥

अर्थ

सुषेण ने आकर श्रीरामजी के चरणारविन्दों में सिर नवाया। उसने पर्वत और औषधि का नाम बताया, (और कहा कि) हे पवनसुत! ओषधि लेने जाओ।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का दोहा ५५ है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान