राम चरन सरसिज उर राखी

चौपाई १, दोहा ५६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजनसुत बल भाषी॥ उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावनु कालनेमि गृह आवा॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामजी के चरणकमलों को हृदय में रखकर पवनपुत्र हनुमानजी अपना बल बखानकर (अर्थात्‌ मैं अभी लिये आता हूँ, ऐसा कहकर) चले। उधर एक गुप्तचर ने रावण को इस रहस्य की खबर दी। तब रावण कालनेमी के घर आया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान