दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना
चौपाई २, दोहा ५६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना॥ देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा॥ २ ॥
अर्थ
रावण ने उसको सारा मर्म (हाल) बतलाया। कालनेमी ने सुना और बार-बार सिर पीटा (खेद प्रकट किया)। [उसने कहा--] तुम्हारे देखते-देखते जिसने नगर जला डाला, उसका मार्ग कौन रोक सकता है ?।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।
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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान