रखवारे हति बिपिन उजारा

चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा॥ जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा॥ ३ ॥

अर्थ

रखवालों को मारकर उसने अशोकवन उजाड़ डाला। आपके देखते-देखते उसने अक्षयकुमार को मार डाला और सम्पूर्ण नगर को जलाकर राख कर दिया। उस समय आपके बल का गर्व कहाँ चला गया था?

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना