राजत रामु सहित भामिनी

चौपाई ३, दोहा ११९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी॥ रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर॥ ३ ॥

अर्थ

पत्नी सहित श्रीरामजी ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो सुमेर के शिखर पर बिजली सहित श्याम मेघ हो। सुन्दर विमान बड़ी शीघ्रता से चला। देवता हर्षित हुए और उन्होंने फूलों की वर्षा की।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।

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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान