रघुपति निकट गयउ घननादा

चौपाई ३, दोहा ५१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा॥ अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे॥ ३ ॥

अर्थ

[तब] मेघनाद श्रीरघुनाथजी के पास गया और उसने [उनके प्रति] अनेकों प्रकार के दुर्बचनों का प्रयोग किया। [फिर] उसने उन पर अस्त्र-शस्त्र तथा और सब हथियार चलाये। प्रभु ने खेल में ही सब को काट कर अलग कर दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

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माल्यवान का रावण को समझाना