देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना

चौपाई ४, दोहा ५१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना॥ जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामजी का प्रताप (सामर्थ्य) देखकर वह मूर्ख लज्जित हो गया और अनेकों प्रकार की माया करने लगा। जैसे कोई व्यक्ति छोटा-सा साँप का बच्चा हाथ में लेकर गरुड़ को डरावे और उससे खेल करे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

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माल्यवान का रावण को समझाना