आवत देखि गयउ नभ सोई

चौपाई २, दोहा ५१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई॥ बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना॥ २ ॥

अर्थ

पहाड़ को आते देखकर वह आकाश में उड़ गया। [उसके] रथ, सारथि और घोड़े सब नष्ट हो गये (चूर-चूर हो गये)। हनुमानजी उसे बार-बार ललकारते हैं। पर वह निकट नहीं आता, क्योंकि वह उनके बल का मर्म जानता था।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

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माल्यवान का रावण को समझाना