राच्छस कपट बेष तहँ सोहा

चौपाई २, दोहा ५७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा॥ जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा॥ २ ॥

अर्थ

राक्षस वहाँ कपट [से मुनि] का वेष बनाये विराजमान था। वह मायापति के दूत को मोहित करना चाहता था। मारुतसुत ने उसके पास जाकर मस्तक नवाया। वह श्रीरामजी के गुणों की कथा कहने लगा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान