होत महा रन रावन रामहिं

चौपाई ३, दोहा ५७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

होत महा रन रावन रामहिं। जितिहहिं राम न संसय या महिं॥ इहाँ भएँ मैं देखउँ भाई। ग्यानदृष्टि बल मोहि अधिकाई॥ ३ ॥

अर्थ

[वह बोला--] रावण और राममें महान्‌ युद्ध हो रहा है। रामजी जीतेंगे इसमें सन्देह नहीं है। हे भाई! मैं यहाँ रहता हुआ ही सब देख रहा हूँ। मुझे ज्ञानदृष्टिका बहुत बड़ा बल है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान