पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी
पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी
चौपाई १, दोहा १२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी॥ मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी॥ १ ॥
अर्थ
पूर्व दिशारूपी पर्वत की गुफा में रहनेवाला, अत्यन्त प्रताप, तेज और बल की राशि यह चन्द्रमारूपी सिंह अन्धकाररूपी मतवाले हाथी के मस्तक को विदीर्ण करके आकाशरूपी वन में निर्भय विचर रहा है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय