पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित
दोहा ११ (ख) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मयंक। कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक॥ ११ (ख) ॥
अर्थ
पूर्व दिशा की ओर देखकर प्रभु श्रीरामजी ने चन्द्रमा को उदय हुआ देखा। तब वे सबसे कहने लगे-चन्द्रमा को तो देखो। कैसा सिंह के समान निडर है!।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का दोहा ११ (ख) है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।
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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय