पुनि सत सर मारा उर माहीं

चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं॥ उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी॥ ४ ॥

अर्थ

फिर सौ बाण उसकी छाती में मारे। वह पृथ्वी पर गिर पड़ा, उसे कुछ भी होश न रहा। फिर मूर्च्छा टूटने पर वह प्रबल रावण उठा और उसने वह शक्ति चलायी जो ब्रह्मा ने उसे दी थी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण और रावण के बीच भीषण युद्ध तथा अस्त्र-शस्त्रों के प्रचंड प्रहार का वर्णन है।

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लक्ष्मण-रावण युद्ध