पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा
पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा
चौपाई ३, दोहा ८३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा॥ सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला॥ ३ ॥
अर्थ
फिर अपने बाणों से [उस पर] प्रहार किया और [उसके] रथ को तोड़कर सारथी को मार डाला। [रावण के] दसों मस्तकों में सौ-सौ बाण मारे। वे सिरों में ऐसे पैठ गये मानो पहाड़ के शिखरों में सर्प प्रवेश कर रहे हों।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण और रावण के बीच भीषण युद्ध तथा अस्त्र-शस्त्रों के प्रचंड प्रहार का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
लक्ष्मण-रावण युद्ध