पुनि कपि कही नीति बिधि नाना
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना
चौपाई ५, दोहा ३५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना॥ रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो॥ ५ ॥
अर्थ
फिर अंगद ने अनेक प्रकार से नीति कही। पर रावण ने नहीं माना; क्योंकि उसका काल निकट आ गया था। शत्रु के गर्व को चूर करके अंगद ने उसे प्रभु श्रीरामचन्द्रजी का सुयश सुनाया और फिर वह बालि नृप का पुत्र यह कहकर चल दिया--।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद