हतौं न खेत खेलाइ खेलाई
हतौं न खेत खेलाइ खेलाई
चौपाई ६, दोहा ३५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई॥ प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा॥ ६ ॥
अर्थ
रणभूमि में तुझे खेला-खेलाकर न मारूँ तबतक अभी क्या बड़ाई करूँ। अंगद ने पहले ही (सभामें आने से पूर्व ही) उसके पुत्र को मार डाला था। वह सुनकर रावण दुखी हो गया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद