प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही
चौपाई ६, दोहा १२१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही॥ प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई॥ ६ ॥
अर्थ
और श्रीजानकीजी सहित प्रभु को देखकर वह [आनन्द-समाधि में मग्र होकर] पृथ्वी पर गिर पड़ा, उसे शरीर की सुधि न रही। श्रीरघुनाथजी ने उसका परम प्रेम देखकर उसे उठाकर हर्ष के साथ हृदय से लगा लिया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।
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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान