प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए
प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए
चौपाई १, दोहा ४६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए॥ राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे॥ १ ॥
अर्थ
उन्होंने प्रभु के चरणकमलों में सिर नवाये। उत्तम योद्धाओं को देखकर रघुपति मन में प्रसन्न हुए। श्रीरामजी ने कृपा करके दोनों को देखा, जिससे वे श्रमरहित और परम सुखी हो गये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ