भुज बल रिपु दल दलमलि देखि
भुज बल रिपु दल दलमलि देखि
दोहा ४५ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत। कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत॥ ४५ ॥
अर्थ
भुजाओं के बल से शत्रु-दल को दलमलि करके और दिन के अन्त को देखकर, दोनों कूद पड़े; वे श्रमरहित होकर वहाँ आ गये जहाँ भगवान् थे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का दोहा ४५ है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ