प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा

चौपाई ३, दोहा ११ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा॥ दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना॥ ३ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीरामजी वानरराज सुग्रीव की गोद में अपना सिर रखे हैं। उनकी बायीं ओर धनुष तथा दाहिनी ओर तरकस [रखा] है। वे अपने दोनों कर-कमलों से बाण सुधार रहे हैं। विभीषणजी कानों से लगकर सलाह कर रहे हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।

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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय