बड़भागी अंगद हनुमाना

चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना॥ प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन॥ ४ ॥

अर्थ

परम भाग्यशाली अंगद और हनुमान् अनेकों प्रकार से प्रभु के चरणकमलों को दबा रहे हैं। लक्ष्मणजी कमर में तरकस कसे और हाथों में धनुष-बाण लिये वीरासन से प्रभु के पीछे सुशोभित हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।

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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय