प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा

चौपाई ४, दोहा ७६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा॥ उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा॥ ४ ॥

अर्थ

फिर उसने प्रभु पर प्रचण्ड शूल छोड़ा। बाण से वार कर उसके असंख्य टुकड़े कर दिये। हनुमानजी और युवराज अंगद फिर उठकर क्रोध करके उसे मारने लगे, पर उसे चोट न लगी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।

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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार