फिरे बीर रिपु मरइ न मारा
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा
चौपाई ५, दोहा ७६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा॥ आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला॥ ५ ॥
अर्थ
शत्रु मारे नहीं मरता, यह देखकर जब वीर लौटे, तब वह घोर चिग्घाड़ करके दौड़ा। उसे क्रुद्ध काल की तरह आता देखकर लक्ष्मणजी ने भयानक बाण छोड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार