आवा परम क्रोध कर मारा
आवा परम क्रोध कर मारा
चौपाई ३, दोहा ७६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा॥ कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए॥ ३ ॥
अर्थ
वह अत्यन्त क्रोध से मारा हुआ आया और बार-बार भयंकर शब्द करके गरजने लगा। मारुतसुत और अंगद क्रोध करके दौड़े। उसने छाती में त्रिशूल मारकर दोनों को धरती पर गिरा दिया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार