प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा

चौपाई ५, दोहा १२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा॥ बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी॥ ५ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीरामजी ने कहा--विष चन्द्रमा का बहुत प्यारा भाई है। इसी से उसने विष को अपने हृदय में स्थान दे रखा है। विषयुक्त अपने किरणसमूह को फैलाकर वह वियोगी नर-नारियों को जलाता रहता है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।

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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय