कोउ कह जब बिधि रति मुख
कोउ कह जब बिधि रति मुख
चौपाई ४, दोहा १२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा॥ छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं॥ ४ ॥
अर्थ
कोई कहता है--जब ब्रह्मा ने [कामदेव की स्त्री] रति का मुख बनाया, तब उसने चन्द्रमा का सार भाग निकाल लिया [जिससे रति का मुख तो परम सुन्दर बन गया, परन्तु चन्द्रमा के हृदय में छेद हो गया]। वही छेद चन्द्रमा के हृदय में वर्तमान है, जिसकी राह से आकाश की काली छाया उसमें दिखाई पड़ती है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।
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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय