कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हार
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हार
दोहा १२ (क) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हार प्रिय दास। तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास॥ १२ (क) ॥
अर्थ
हनुमानजी ने कहा- हे प्रभो ! सुनिये, चन्द्रमा आपका प्रिय दास है। आपकी सुन्दर श्याम मूर्ति चन्द्रमा के हृदय में बसती है, वही श्यामता की झलक चन्द्रमा में है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय” प्रकरण का दोहा १२ (क) है। इस प्रकरण में सुबेल पर्वत पर श्रीराम की मनोहर झाँकी और चंद्रोदय की अलौकिक शोभा का वर्णन है।
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सुबेल पर राम की झाँकी, चंद्रोदय