देखेसि आवत पबि सम बाना

चौपाई ६, दोहा ७६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना॥ बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई॥ ६ ॥

अर्थ

वज्र के समान बाणों को आते देखकर वह दुष्ट तुरंत अन्तर्धान हो गया और फिर विविध वेश धारण कर युद्ध करने लगा। वह कभी प्रगट होता था और कभी दूर चला जाता था।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ७६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।

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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार