पति गति देखि ते करहिं पुकारा

चौपाई २, दोहा १०४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा॥ उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना॥ २ ॥

अर्थ

पति की गति देखकर वे पुकार-पुकारकर रोने लगीं। केश खुल गये, देह की सँभाल नहीं रही। वे अनेक प्रकार से छाती पीटती हैं और रोती हुई रावण के प्रताप का बखान करती हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मन्दोदरी के विलाप और विभीषण द्वारा रावण की अन्त्येष्टि क्रिया का वर्णन है।

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मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि