पति सिर देखत मंदोदरी
पति सिर देखत मंदोदरी
चौपाई १, दोहा १०४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी॥ जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आईं॥ १ ॥
अर्थ
पति का सिर देखते ही मन्दोदरी व्याकुल और मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़ी। स्त्रियाँ रोती हुई उठ दौड़ीं और उसे उठाकर रावण के पास आयीं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मन्दोदरी के विलाप और विभीषण द्वारा रावण की अन्त्येष्टि क्रिया का वर्णन है।
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मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि