परेउ मुरुछि महि लागत सायक

चौपाई १, दोहा ५९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक॥ सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए॥ १ ॥

अर्थ

बाण लगते ही हनुमानजी 'राम, राम, रघुपति' का उच्चारण करते हुए मूच्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। प्रिय वचन (रामनाम) सुनकर भरतजी उठकर दौड़े और बड़ी उतावली से हनुमानजी के पास आये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में औषधि लेकर लौटते हनुमान पर भरत के बाण का प्रहार और उनके बीच भावपूर्ण मिलन-संवाद का वर्णन है।

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भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद