पद पाताल सीस अज धामा
पद पाताल सीस अज धामा
चौपाई १, दोहा १५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा॥ भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला॥ १ ॥
अर्थ
पाताल [जिन विश्वरूप भगवान् का] चरण है, ब्रह्मलोक सिर है, अन्य (बीच के सब) लोकों का विश्राम (स्थिति) जिनके अन्य भिन्न-भिन्न अङ्गों पर है। भयङ्कर काल जिनका भृकुटि-संचालन (भौंहों का चलना) है। सूर्य नेत्र हैं, बादलों का समूह बाल है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।
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मंदोदरी का राम-महिमा कथन