जासु घ्रान अस्विनीकुमारा

चौपाई २, दोहा १५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा॥ श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी॥ २ ॥

अर्थ

अश्विनीकुमार जिनकी नासिका हैं, रात और दिन जिनके अपार निमेष (पलक मारना और खोलना) हैं। दसों दिशाएँ कान हैं, वेद ऐसा कहते हैं। वायु श्वास है और वेद जिनकी अपनी वाणी है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

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मंदोदरी का राम-महिमा कथन