दसन गहहु तृन कंठ कुठारी

चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी॥ सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें॥ ४ ॥

अर्थ

दाँतों में तिनका दबाओ, गले में कुल्हाड़ी डालो और परिजनों सहित अपनी नारी को साथ लेकर, आदरपूर्वक जनकसुता को आगे करके, इस प्रकार सब भय छोड़कर चलो--।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद