निसिचर अनी देखि कपि फिरे
निसिचर अनी देखि कपि फिरे
चौपाई ३, दोहा ४६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे॥ द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी॥ ३ ॥
अर्थ
राक्षसों की सेना आती देखकर वानर लौट पड़े और वे योद्धा जहाँ-तहाँ कटकटाकर भिड़ गये। दोनों ही दल बड़े बलवान् हैं। योद्धा ललकार-ललकारकर लड़ते हैं, कोई हार नहीं मानता।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
युद्धारम्भ