निसा जानि कपि चारिउ अनी

चौपाई १, दोहा ४८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी॥ राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही॥ १ ॥

अर्थ

रात हुई जानकर वानरों की चारों सेनाएँ (टुकड़ियाँ) वहाँ आयीं जहाँ कोसलपति श्रीरामजी थे। श्रीरामजी ने ज्यों ही सब को कृपा करके देखा त्यों ही ये वानर श्रमरहित हो गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
माल्यवान का रावण को समझाना