कछु मारे कछु घायल कछु गढ़

दोहा ४७ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ। गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ॥ ४७ ॥

अर्थ

कुछ मारे गये, कुछ घायल हुए, कुछ भागकर गढ़ पर चढ़ गये। अपने बल से शत्रु दल को विचलित करके रीछ और वानर [वीर] गरज रहे हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का दोहा ४७ है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

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युद्धारम्भ