नाथ बयरु कीजे ताही सों
नाथ बयरु कीजे ताही सों
चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों॥ तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा॥ ३ ॥
अर्थ
हे नाथ! वैर उसी के साथ करना चाहिये जिससे बुद्धि और बल के द्वारा जीता जा सके। आप में और श्रीरघुनाथजी में निश्चय ही कैसा अन्तर है, जैसा जुगनू और सूर्य में।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश