तुरत पवनसुत गवनत भयऊ
तुरत पवनसुत गवनत भयऊ
चौपाई २, दोहा १२१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तुरत पवनसुत गवनत भयऊ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ॥ नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुति करि पुनि आसिष दीन्ही॥ २ ॥
अर्थ
पवनपुत्र हनुमानजी तुरंत ही चल दिये। तब प्रभु भरद्वाजजी के पास गये। मुनि ने [इष्टबुद्धि से] उनकी अनेकों प्रकार से पूजा की और स्तुति की और फिर [लीला की दृष्टि से] आशीर्वाद दिया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।
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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान