मोहि रहा अति अभिमान
मोहि रहा अति अभिमान
छन्द ६, दोहा ११३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान॥ अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज॥ ६ ॥
अर्थ
मुझे अत्यन्त अभिमान था कि मेरे समान कोई नहीं है, पर अब प्रभु के चरणकमलों के दर्शन करने से दुःख-समूह देनेवाला मेरा वह अभिमान जाता रहा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द ६, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।
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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा