मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे

दोहा ५४ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ। जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ॥ ५४ ॥

अर्थ

मेघनाद के समान सौ करोड़ (अगणित) योद्धा उन्हें उठा रहे हैं। परन्तु जगत्‌ के आधार श्रीशेषजी (लक्ष्मणजी) उनसे कैसे उठते ? तब वे लजाकर चले गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार” प्रकरण का दोहा ५४ है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मणजी का मूर्च्छित होना का वर्णन है।

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लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार