बीरघातिनी छाड़िसि साँगी
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी
चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेजपुंज लछिमन उर लागी॥ मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें॥ ४ ॥
अर्थ
तब उसने वीरघातिनी शक्ति चलायी। वह तेजपूर्ण शक्ति लक्ष्मणजी की छाती में लगी। शक्ति के लगने से उन्हें मूर्छा आ गयी। तब मेघनाद भय छोड़कर उनके पास चला गया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मणजी का मूर्च्छित होना का वर्णन है।
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लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार