मारिसि मेघनाद कै छाती
मारिसि मेघनाद कै छाती
चौपाई ४, दोहा ७४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती॥ पुनि रिसान गहि चरन फिरायो। महि पछारि निज बल देखरायो॥ ४ ॥
अर्थ
उसने मेघनाद की छाती पर वार किया। वह देवताओं का शत्रु चक्कर खाकर पृथ्वी पर गिर पड़ा। फिर क्रोध में भरकर उसने पैर पकड़कर उसे घुमाया और पृथ्वी पर पछाड़कर अपना बल दिखाया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना