बर प्रसाद सो मरइ न मारा
बर प्रसाद सो मरइ न मारा
चौपाई ५, दोहा ७४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा॥ इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो॥ ५ ॥
अर्थ
[किन्तु] वरदान के प्रताप से वह मारे नहीं मरता। तब जामवंत ने उसका पैर पकड़कर उसे लंका पर फेंक दिया। इहाँ देवर्षि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना