बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही
चौपाई ३, दोहा ७४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही॥ अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो॥ ३ ॥
अर्थ
अरे मूर्ख! मैंने बूढ़ा जानकर तुझे छोड़ दिया था। अरे अधम! अब तू मुझे ललकारने लगा है? ऐसा कहकर उसने चमकता हुआ त्रिशूल चलाया। जामवंत ने उसी त्रिशूल को हाथ से पकड़कर दौड़ा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना