मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई

चौपाई ५, दोहा ७५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई॥ जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन॥ ५ ॥

अर्थ

हे भाई! सुनो, उसको ऐसे बल और बुद्धि के उपाय से मारना, जिससे निशाचर का नाश हो। हे जामवंत, सुग्रीव, विभीषण! तुम तीनों जन सेना समेत रहना।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना