जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन

चौपाई ६, दोहा ७५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन॥ प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा॥ ६ ॥

अर्थ

जब श्रीरघुवीर ने आज्ञा दी, तब कमर में निषंग कसकर और सरासन सजाकर रणधीर श्रीलक्ष्मणजी प्रभु के प्रताप को हृदय में धारण करके मेघ के समान गम्भीर वाणी बोले।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना